''फूलों की खुशबू हो या चिड़ियों का कलरव भी
मानव -जनित या नैसर्गिक उत्सव भी
जिस आकर्सन का मै कर पता प्रतिकार नहीं
मन को बहलाता हूँ कहकर ,ये सानिध्य मुझे स्वीकार नहीं ''
Thursday, September 22, 2011
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