skip to main
|
skip to sidebar
BRIJENDRA VERMA
Tuesday, August 1, 2017
फीर से कोई जेहन पे छाने लगा है
बेधडक ख्वाबो में आने लगा है
गीत गाता हूँ अकेले पर लगता है
कोई साथ में गुनगुनाने लगा है
कर दो तुम मेरा तिरस्कार!
सर्वस्व समर्पन के ,स्वाभाविक प्रतिबंधों में तुमसे हार गया,
मैं पतित हुआ ,दम्भ -आवेश में तुम सी संगी को बिसार गया,
निष्कपट प्रेम पाकर भी तुमसे,भटका है मन अनगिनत बार।
कर दो तुम मेरा तिरस्कार.....
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
Followers
Blog Archive
▼
2017
(2)
▼
August
(2)
फीर से कोई जेहन पे छाने लगा है बेधडक ख्वाबो म...
कर दो तुम मेरा तिरस्कार! सर्वस्व समर्पन के ,स्वाभ...
►
2012
(4)
►
April
(2)
►
January
(2)
►
2011
(4)
►
September
(1)
►
August
(3)
About Me
BRIJENDRA PAL VERMA
View my complete profile