कर दो तुम मेरा तिरस्कार!
सर्वस्व समर्पन के ,स्वाभाविक प्रतिबंधों में तुमसे हार गया,
मैं पतित हुआ ,दम्भ -आवेश में तुम सी संगी को बिसार गया,
निष्कपट प्रेम पाकर भी तुमसे,भटका है मन अनगिनत बार।
कर दो तुम मेरा तिरस्कार.....
सर्वस्व समर्पन के ,स्वाभाविक प्रतिबंधों में तुमसे हार गया,
मैं पतित हुआ ,दम्भ -आवेश में तुम सी संगी को बिसार गया,
निष्कपट प्रेम पाकर भी तुमसे,भटका है मन अनगिनत बार।
कर दो तुम मेरा तिरस्कार.....

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